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सफेद दाग को समाज में छुआछूत से जोड़ कर देखा जाता है। इसी को खत्म करने की कोशिश में जुड़ी हैं विटिलिगो काउंसलर दीपिका दिवाकर। विश्व विटिलिगो दिवस के मौके पर दीपिका दिवाकर ने बताया कि सफेद दाग बीमारी को हमारे समाज में छुआछूत से जोड़ कर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि अज्ञानता की वजह से कुछ लोग इसे कुष्ठ रोग भी समझ लेते हैं।

कई बार सफेद दाग की वजह से मरीज और उसके परिवार को भी सामाजिक भ्रांतियों में पड़ कर नौकरी, शादी-विवाद आदि में परेशानी  का सामना करना पड़ता है और भी कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ती है। विटिलिगो काउंसलर ने बताया कि जब इंसान के शरीर में रंग बनाने वाली कोशिकाएं विपरीत अवस्था में कार्य करने लगती हैं, तो त्वचा पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं।

वर्षों पहले इसे श्वेत कुष्ठ माना जाता था। लोग मरीज से दूरी बनाना शुरू कर देते थे, जबकि यह गलत धारणा है। विटिलिगो काउंसलर दीपिका ने आगे कहा कि सफेद दाग छुआछूत की बीमारी नहीं है और न ही यह किसी तरह का कुष्ठ है। अगर मरीज जल्दी डॉक्टर के पास पहुंचता है, तो उसका पूरी तरह से उपचार हो सकता है।

सफेद दाग के प्रति इसी भ्रांति को दूर करने के लिए प्रति वर्ष 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में दो प्रतिशत और भारत में तीन से पांच प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। 10 वर्ष के बच्चों से लेकर 30 साल तक के लोगों में यह रोग ज्यादा पाया जाता है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। विटिलिगो काउंसलर ने कहा कि इस रोग को छिपायें नहीं, बल्कि जल्द से जल्द चिकित्सक को दिखायें। दवाओं और सर्जरी से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। सफेद दाग त्वचा ऑटो इम्यून बीमारी है, जिसका संबंध मेलेनिन नामक पिगमेंट से है, जो हमारी त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार है।

मेलेनिन मेलेनोसाइट नामक कोशिका से बनता है। ऑटो इम्यून बीमारी में शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली इस कोशिका को नष्ट करने लगती है और मेलेनिन का बनना धीरे-धीरे बंद होने लगता है। शरीर के जिस स्थान पर यह असर करता है, वहां की चमड़ी सफेद होने लगती है, जिसे सफेद दाग, विटिलिगो अथवा ल्यूकोडर्मा के नाम से जाना जाता हैं।

यह बीमारी क्यों होती है ?

इसका आज तक ठीक-ठीक पता नहीं लगाया जा सका है। जब इंसान के शरीर में रंग बनाने वाली कोशिकाएं विपरीत अवस्था में कार्य करने लगती हैं, तो त्वचा पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं।

विटिलिगो काउंसलर दीपिका दिवाकर कहा कि इलाज संभव है पर उससे भी ज्यादा जरूरी है खुद को इसी रूप में अपनाना और हताश ना होना और खुश रहना और अपने सभी कार्य को मेहनत से करना ।

दीपिका दिवाकर खुद एक विटिलीगो फाइटर हैं। उन्होंने अपने बारे में बताया कि वह 7 साल की छोटी उम्र से अब तक बहुत उतार चढाव देखने के बाद आज आप उन लोगों के लिए काम कर रही हैं जो इस बीमारी से हताश हो चुके हैं

बिहार, झारखंड और ओडिशा में मॉनसून की बारिश शुरू हो गई है. भारतीय मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा बुलेटिन के मुताबिक, मॉनसून की दस्तक के बाद महाराष्ट्र के करीब सभी हिस्सों और गोवा में झमाझम बारिश हो रही है. अगले 48 से 72 घंटे में इसके पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश पहुंचने की उम्मीद है

 मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर पश्चिम राजस्थान से एक ट्रॉफ लाइन उत्तरी बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है. इससे पूर्वी राजस्थान, दक्षिणी उत्तर-प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक निम्न दबाव का क्षेत्र बना है. इससे ट्रॉफ लाइन के आसपास के इलाके में बारिश के आसार बने हैं. आपको बता दें कि देश के 36 सब-डिविजन में से 22 में अब तक सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश हुई है.

इसमें कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, पंजाब और हरियाणा शामिल है

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने छात्रों को बड़ा तोहफा दिया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ऐलान किया कि जिस परिवार की सलाना इनकम एक लाख रुपये से कम है, उनको फीस की 100 फीसदी स्कॉलरशिप मिलेगी यानी ऐसे लोग जितनी फीस जमा करेंगे, उनको उतने रुपये स्कॉलरशिप के रूप में वापस मिल जाएंगे। वहीं, जिन छात्रों के परिवार की वार्षिक इनकम एक लाख रुपये से ढाई लाख रुपये है, उनको फीस की 50 फीसदी रकम स्कॉलरशिप के रूप में वापस मिलेगी। इसके अतिरिक्त जिस परिवार की सलाना इनकम ढाई लाख रुपये से लेकर 6 लाख रुपये तक है, उनको फीस की 25 फीसदी धनराशि स्कॉलरशिप के तौर पर मिलेगा। दिल्ली सरकार के इस फैसले से गरीब छात्रों और मध्यम वर्ग के छात्रों को काफी राहत मिलेगी।

राजधानी दिल्ली में एक दिल दहलाने वाला सामने आया है। दिल्ली के महरौली इलाके में एक शख्स ने अपने 3 बच्चों के साथ पत्नी की हत्या कर दी। आरोपी शख्स ने पहले तीन लोगों की पत्थर काटने वाली ग्राइंडर मशीन से हत्या की। वहीं एक 12 साल के मासूम बच्चे की गला घोटकर हत्या की गई। पुलिस आरोपी शख्स को हिरासत में लेकर मामले की जांच कर रही है। आरोपी ने खुद नोट लिखकर मर्डर की बात कबूली है, लेकिन उसने इसके पीछे की वजह फिलहाल नहीं बताई है।

पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू बीते तीन दिनों तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने के लिए दिल्ली में डटे रहे लेकिन बुलावा न आने पर नवजोत सिंह सिद्धू वापस पंजाब लौट गए। इसके बाद सिद्धू समेत अन्य राज्यों के नेताओं से न मिलने पर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले दिनों राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भी उनसे बिना मिले ही लौट गए थे।

इससे पहले दस जून को सिद्धू प्रियंका और अहमद पटेल की मौजूदगी में राहुल से मिले थे। सिद्धू ने लिखित तौर पर अपना पक्ष उनके समक्ष रखा था। उस बैठक में पटेल को इस बात का जिम्मा सौंपा गया था कि पंजाब में सिद्धू और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के बीच दूरियां कम कराई जाएं। हाल ही में सिद्धू को दिल्ली बुलाकर संगठन के काम से जोडने की खबरें आई थीं।     

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी दो दिवसीय दौरे पर आज अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचेंगी। यहां वह सबसे पहले दिवंगत भाजपा नेता व पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह के घर बरौलिया के अमरबोझा गांव गोवा के मुख्यमंत्री डा. प्रमोद सांवत के साथ पहुंच परिवार के लोगों से भेंट करेंगी।

बरौलिया से निकलने के बाद वह तिलोई के राजा विश्वनाथ शरण सिंह इंटर कालेज में एक साथ विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण कार्यक्रम में सूबे के उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य के साथ हिस्सा लेगी और जनसभा को भी संबोधित करेंगी।   

 

लोकसभा में कल एक बार में तीन तलाक को गैर कानूनी ठहराने वाला मुस्लिम महिला विधेयक पेश किया गया।  17वीं लोकसभा के गठन के बाद नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला बिल था। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत के संविधान में कहा गया है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता, इसलिए यह संविधान के खिलाफ कतई नहीं है बल्कि अधिकारों से जुड़ा हैं।

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनता ने हमें कानून बनाने के लिए चुना है और कानून पर बहस अदालत में होती है और कोई लोकसभा को अदालत न बनाए। इस दौरान ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस बिल से सिर्फ मुस्लिम पुरुषों को सजा मिलेगी, सरकार को सिर्फ मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी क्यों है।

ओवैसी ने कहा कि केरल की हिन्दू महिलाओं की चिंता सरकार क्यों नहीं कर रही है। ओवैसी ने सवाल करते हुए कहा कि इस बिल के बाद जो पति जेल जाएंगे उनकी पत्नियों का खर्चा क्या सरकार देने के लिए तैयार है। वही दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की तरफ से सांसद शशि थरूर ने बिल के पेश होने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जो बिल लाया जा रहा है, वह संविधान के खिलाफ है।

भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पीएम नरेंद्र मोदी को ब्रिटिश हेराल्ड के एक पोल में रीडर्स ने 2019 का दुनिया का सबसे ताकतवर शख्स चुना है। इस पोल में पीएम मोदी ने दुनिया के अन्य ताकतवर नेताओं जैसे व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग को भी मात दी है।

बतागें नॉमिनेशन लिस्ट में दुनिया की 25 से ज्यादा हस्तियों को शामिल किया गया था और जज करने वाले पैनल एक्सपर्ट्स ने सबसे ताकतवर शख्स के तमगे के लिए 4 उम्मीदवारों का नाम सामने रखा। चयन प्रक्रिया का मूल्यांकन इन सभी आंकड़ों के व्यापक अध्ययन और रिसर्च पर आधारित था।         

मुज़फ़्फ़रपुर के बच्चों की चीखें अब फिल्मी दुनिया तक पहुंच चुकी है। वीरवार को मुज़फ़्फ़रपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भोजपुरी फिल्म अभिनेता खेसारी लाल यादव पहुंचे।

 खेसारी लाल के पहुंचते ही जमकर हंगामा हुआ और नारेबाजी भी की गई। इस नारे बाजी का असर ये हुआ की दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों को ला रही एम्बुलेंस भी भीड़ में फंसी रही।

 इसी बीच खेसारी लाल और मेडिकल कर्मियों के साथ धक्का मुक्की भी हुई। जिसकी जानकारी मिलने पर SSP मनोज कुमार वहां पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।

 बता दें कि मीडिया कर्मियों की इमरजेंसी सहित कई वार्डो में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिसको लेकर ये पूरा हंगामा हुआ है। मुज़फ़्फ़रपुर में बीते दिनों सीएम नीतीश कुमार के दौरे के बाद से सीएम वापस जाओ के नारे लगे थे। जिसके बाद मीडिया कर्मियों के लिए पाबंदी लगाई गई है।

अमित शाह के केंद्रीय गृह मंत्री बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी और इस पर सोमवार को उस समय विराम लग गया जब पूर्व केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का ऐलान कर दिया गया। दिल्ली में बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में लिए फैसले के बारे में बताते हुए रक्षा मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा कि नड्डा बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष होंगे. इस बीच अमित शाह पार्टी अध्यक्ष बने रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में अमित शाह के शामिल होने के बाद जेपी नड्डा को पार्टी की कमान सौंपी गई है। माना जा रहा है कि अमित शाह अगले 6 महीने तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे. अमित शाह के साथ मिलकर ही जेपी नड्डा बतौर कार्यकारी अध्यक्ष पार्टी का कामकाज संभालेंगे। गृह मंत्रालय जैसे अहम विभाग संभालने के कारण अमित शाह की पार्टी पर ज्यादा ध्यान देने की संभावना कम ही है। ऐसे में नड्डा ही पार्टी के मुख्य कर्ताधर्ता रहेंगे, हालांकि अमित शाह अभी अध्यक्ष पद पर काबिज हैं और हर फैसले पर उनकी नजर रहेगी।

हिमाचल प्रदेश जैसे राजनीतिक लिहाज से कमतर राज्य से आने वाले जय प्रकाश नड्डा के लिए कार्यकारी अध्यक्ष पद पर काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा, अगर वह अगले 6 महीने के लिए भी पार्टी के प्रमुख के तौर पर काम करते हैं तो भी उनके सामने चुनौतियां कम नहीं होंगी।

अमित शाह की विशालकाय छवि

अमित शाह ने अपने कार्यकाल में बीजेपी को जिस मुकाम पर पहुंचाया उसे बनाए रखना अगले अध्यक्ष के लिए चुनौती भरा रहेगा। जेपी नड्डा अभी कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं, लेकिन उनके सामने पार्टी को शीर्ष पर बनाए रखने के साथ-साथ खुद को एक सशक्त और दमदार अध्यक्ष के रूप में पेश करना होगा। सभी की नजर इस पर रहेगी कि वह इस मकसद में कितना कामयाब हो पाते हैं।

4 राज्यों में विधानसभा चुनाव

बतौर अध्यक्ष अमित शाह के दौर में बीजेपी को जिस तरह की बंपर कामयाबी मिली उसे बनाए रखना नड्डा के लिए चुनौतीपूर्ण है। उनके कार्यकारी अध्यक्ष के कार्यकाल (अगले 6-7 महीने) में कम से कम 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से दिल्ली को छोड़ 3 राज्य ऐसे हैं जहां पर बीजेपी खुद सत्ता में है और उसे सत्ताविरोधी माहौल के बीच चुनाव में जीत हासिल करने की चुनौती होगी। ये 3 राज्य हैं महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड. हरियाणा में अक्टूबर में विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है, तो महाराष्ट्र में नवंबर में. जबकि झारखंड में 5 जनवरी को कार्यकाल समाप्त हो रहा है। नड्डा के सामने इन तीनों राज्यों में बीजेपी की सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। अभी वहां राष्ट्रपति शासन है और अगले कुछ महीनों में वहां पर चुनाव होना है और पार्टी को बड़ी जीत दिलाने की जिम्मेदारी भी रहेगी।

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से चुनौती

दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी अगले साल की शुरुआत में होने वाला है। विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी, 2020 को खत्म हो रहा है। दिल्ली में इस समय आम आदमी पार्टी सत्ता में है और उसने पिछले विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए दूसरी बार सत्ता पर काबिज हुई थी। बीजेपी की कोशिश पिछली बार ही सत्ता में लौटने की थी, लेकिन अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के सपने को तोड़ दिया। हालांकि पिछले महीने खत्म हुए लोकसभा चुनाव में आप पार्टी का जो प्रदर्शन रहा उससे बीजेपी बेहद उत्साहित होगी क्योंकि उसने सभी सातों की सातों सीट पर कब्जा जमा लिया।

हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था, लेकिन कुछ महीने बाद जब विधानसभा चुनाव आया तो बीजेपी को 70 में से सिर्फ 3 सीटें मिल सकीं. शेष 67 सीटों पर आम आदमी पार्टी विजयी रही थी. इस बार भी सातों सीटें जीतकर बीजेपी पूरे जोश में है, लेकिन नए कार्यकारी अध्यक्ष के सामने यह सुनिश्चित करना होगा कि 2015 के विधानसभा चुनाव जैसे हालात 2020 में न बनें। यह भी तय है कि विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को चुनौती देना आसान नहीं होगा और इसके लिए कवायद अभी से शुरू कर देनी होगी।

शिवसेना को साथ रखने की चुनौती

लोकसभा चुनाव से पहले तक बागी तेवर बनाए रखने वाली शिवसेना ने बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया और उसका यह निर्णय अन्य विपक्षी दलों के परिणाम देखने के बाद सही लगता है, लेकिन ऐसे में शिवसेना के वजूद पर ही खतरा मंडराने लगता है। नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपक्ष लेने के कुछ ही दिन में पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे का अयोध्या जाना दिखाता है कि शिवसेना अपने अस्तित्व के लिए जद्दोजहद जारी रखेगी। हालांकि यह भी सही है कि बीजेपी इस बार भी अपने दम पर सत्ता में है, लेकिन नड्डा के सामने एनडीए को भी बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी क्योंकि बीजेपी के बाद शिवसेना ही दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।

बिहार में जेडीयू से दोस्ती

महाराष्ट्र की तरह बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के साथ सत्ता पर काबिज बीजेपी के सामने गठबंधन को बनाए रखने की चुनौती है। बिहार में एनडीए को लोकसभा चुनाव में जोरदार जीत मिली है। अब कई मोर्चों पर नीतीश कुमार की सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। 2015 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और महागठबंधन के तहत जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में नीतीश ने लालू प्रसाद यादव की आरजेडी के नाता तोड़ लिया और बीजेपी के साथ फिर से नई सरकार बना ली। राज्य में अगले डेढ़ साल में विधानसभा चुनाव होने हैं और यहां पर भी नड्डा के सामने एनडीए घटक दलों को साथ बनाए रखने की चुनौती रहेगी।

दक्षिण भारत के लिए नई रणनीति

बीजेपी को उम्मीद थी कि इस बार लोकसभा चुनाव में कर्नाटक के अलावा दक्षिण भारत के अन्य राज्यों से उसके खाते में कुछ सीटें आएंगी, लेकिन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में बीजेपी की स्थिति काफी खराब रही। आंध्र और केरल समेत तमिलनाडु में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली. बीजेपी ने इन राज्यों में जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था, लेकिन निराशा हाथ लगी। अब नड्डा के सामने दक्षिण में सीट जीतने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।

बड़बोले नेताओं पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी

अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद कार्यकारी अध्यक्ष बने जेपी नड्डा के पास एक बड़ी चुनौती यह भी रहेगी कि वह अपने कई बड़बोले नेताओं पर किस तरह से लगाम लगा पाते हैं। गिरिराज सिंह, साध्वी प्रज्ञा और साक्षी महाराज जैसे नेता अक्सर अपने बयानों को लेकर पार्टी को संकट में डालते रहे हैं। पिछले दिनों इफ्तार को लेकर गिरिराज की टिप्पणी के बाद अमित शाह ने उनको फटकार लगाई और नियंत्रण रखने की सलाह भी दे डाली थी।

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