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Chhath Puja 2018: Significance Vrat Muhurat Puja Vidhi

दीपोत्सव के बाद घर से घाट तक छठ महापर्व का माहौल बन रहा है। ‘पहिले-पहिले हम कइली छठ मइया बरत तोहार, करिह क्षमा छठी मइया भूल-चूक गलती हमार..’ जैसे पारंपरिक गीत गुनगुनाते हुए घर की महिलाएं छठ मइया का प्रसाद तैयार करने में जुट गई हैं। प्रसाद की सामग्री को धुलकर सुखाने और साफ-सुथरा करने का कार्य शुरू हो गया है। रविवार से यह पर्व शुरू हो जाएगा।

महापर्व की शुरूआत 11 नंवबर को नहाय-खाय से होगी। इसे ‘कद्दू भात’ भी कहते हैं। इस दिन बिना मसाले के कद्दू की सब्जी का सेवन किया जाएगा। माना जाता है कि कद्दू में 96 प्रतिशत पानी होता है। इसलिए तन-मन निर्मल रहता है। पहले दिन महिलाएं सिर धोकर स्नान करेंगी। नाखून काटकर शरीर को पूरी तरह से स्वच्छ बनाएंगी। भोजन भी इतना हल्का रहेगा कि शरीर पूरी तरह से शुद्ध रहे।

दूसरे दिन 12 नवंबर को खरना होगा। इस दिन निर्जला व्रत होगा। इसे ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। शाम को सूखी रोटी और गुड़ की खीर व केला अर्पित कर छठ मइया की पूजा प्रारंभ होगी। तीन दिन तक व्रती महिलाएं कठिन साधना करेंगे। बिस्तर के बजाय चटाई पर सोएंगे। व्रती महिलाएं उसी कमरे में सोएंगी जहां अर्घ्य के पकवान बनाए जाते हैं। स्वच्छता का बहुत ध्यान रखा जाएगा।

13 नवंबर को तीसरे दिन सायं कालीन अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। व्रत करने वाले सूर्य डूबने से पहले घाट पर पहुंच जाएंगे। शुभ मुहूर्त में जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य देंगे। माना जाता है कि डूबते सूर्य की लाल किरणें अर्घ्य के जल से छनकर तन-मन और बुद्धि को तेज कर देती हैं।

14 नवंबर को व्रती महिलाएं व पुरुष उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भोर में उसी जगह एकत्र होंगे जहां डूबते सूर्य के लिए पूजन किया था। महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य देने से पूर्व गंगा जल का आचमन करेंगी। विधि विधान से अर्घ्य देकर सूर्यदेव से सुख-समृद्धि का आशीष मांगेगी। पूजन के बाद घाट पर प्रसाद बांटकर पारण किया जाएगा।

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Last modified on Tuesday, 13 November 2018 13:15